जिहाद शब्द के इस्तेमाल करने से महज कोई आतंकी नहीं होता, महाराष्ट्र की कोर्ट ने कहा|

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जिहाद शब्द के इस्तेमाल करने से महज कोई आतंकी नहीं होता, महाराष्ट्र की कोर्ट ने कहा|

maharashtra news 2019

महाराष्ट्र की कोर्ट ने कहा की महज जिहाद शब्द का इस्तमाल करने पे कोई आतंकी नहीं होता है |अदालत ने ये बात आतंकवाद फ़ैलाने के आरोप में तीन लोगो को आरोप से मुक्त करते हुए कहा|

अकोला के न्यायधीश एएस जाधव तीन आरोपियों की सुनवाई कर रहे थे | तीनो लोगो पे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम,और बॉम्बे पुलिस अधिनियम और शस्र अधिनियम के आरोप थे |



ये मामला 25 सितंबर 2015 को अकोला में मस्जिद के बाहर पुलिसकर्मियों पर हमले का था,
अब्दुल रज्जाक , शोएब खान और सलीम मलिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था |


जज, जाधव ने कहा की, घटना का विवरण देखने पर लगता है की  रज्जाक का गुस्सा सरकार और  कुछ हिंदू संघठन के खिलाफ था | 


न्यायधीश ने कहा की इसमें कोई शक नहीं की रज्जाक ने इस घटना के वक्त जिहाद शब्द का इस्तेमाल किया हो , लेकिन किसी को और केवल ये शब्द बोलने पर किसी को आतंकी नहीं ठराया जा सकता , न्यायधीश जाधव ने कहा का जिहाद एक अरबी शब्द है और उसका मतलब सिर्फ संघर्ष है |






आगे न्यायधीश ने कहा की सिर्फ ये बोलने से कोई आतंकी नहीं हो जाता है | विशेष अदालत ने रज्जाक को पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई ,लेकिन रज्जाक घटना के बाद से ही जेल में था इसलिए उसकी सजा का अवधि पुरा मानकर उसे रिहा करने का आधेश न्यायधीश जाधव ने दिया

यह शब्द बोलने से कोई आतंकी नहीं हो जाता। विशेष अदालत ने पुलिसकर्मियों पर हमले के लिए रज्जाक को तीन साल की सजा सुनाई लेकिन वह घटना के बाद से ही जेल में था, इसलिए उसकी सजा अवधि पूरी मानकर उसे रिहा करने का आदेश दिया।